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successtoryबुरहानपुर में मल्टीनेशनल कंपनी की लाखों रूपए पैकेज की नौकरी छोडकर युवा बना उद्यमी

पढे बुरहानपुर जिला अस्पताल में कैसे हो रही आवारा मवेशियों की एंट्री

– युवा को उद्यमी बनने में पीएमएफएमई योजना बनी मददगार

 

successtoryबुरहानपुर ()बुरहानपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्लैगशीप कार्यक्रम  एक जिला एक उत्पाद और लघु खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) युवाओ को अपने सपने साकार करने में काफी मदद मिल रही है जिले में युवा मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरिया छोडकर सरकारी मदद लेकर खुद के उद्यम स्थापित करके विकसित आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में अपनी भागीदारी दे रहे है पेश है एक रिपोर्ट

यह है बुरहानपुर जिले के शाहपुर में रहने वाले उच्चशिक्षित युवा हर्षल लांडे, हर्षल लांडे मुंबई में एमबीए तक की उच्च शिक्षा हासिल करके मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी सैलरी, आरामदायक जिंदगी और एक सुरक्षित करियर कर रहे थे लेकिन उनके मन के अंदर एक सवाल हमेशा उठता था कि जो  मैं कर रहा हुं वह सही है किसान परिवार में जन्मे हर्षल से बचपन में अपने पिता को खेतों में काम करते देखा  बचपन से हर्षल ने खेतों में मेहनत मिट्टी की खूशबु और फसल की खूशी को करीब से महसूस की है

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 20247 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लिया है इस संकल्प में अपनी भागीदारी देने के लिए हर्षल ने नौकरी छोड अपने ही गांव में उद्यमी बनने का फैसला किया बुरहानपुर जिले में केला फसल सबसे अधिक होती है एक जिला एक उत्पाद में केले को शामिल किया गया है हर्षल ने केले के चिप्स का कारोबार शुरू किया इसके लिए मददगार बनी  प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत मिला 35 लाख का लोन सरकार ने इस पर 10 लाख  का अनुदान दिया हर्षल अब क्षेत्र में सफल उद्यमी बन गए है उनके यहां 30 से अधिक लोग रोजगार पा रहे है जिनमें महिलाओ की संख्या अधिक है हर्षल ने सभी युवाओ से अपील की है कि सरकारी या मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरिया ढूंढने की बजाए भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी मदद लेकर अपना उद्योग स्थापित करें

मध्यप्रदेश में युवा उद्यमिता को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार इस योजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सक्रिय प्रोत्साहन और समर्थन से राज्य में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विकास की ओर बढ़ रहा है। सरकार द्वारा प्रदान की जा रही अनुदान योजनाएँ, रियायती ऋण सुविधाएँ युवाओं के लिए व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया को सरल और सुगम बना रही हैं।मध्यप्रदेश सरकार युवाओं के उद्यम और नवाचार को बल देकर, उनके सपनों को नई ऊँचाई दे रही है। आज के युवा केवल अच्छी नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि कुछ नया करने की इच्छाशक्ति भी रखते है।

जिले के युवा उद्यमी ने बनायी नई पहचान

ऐसी ही एक कहानी साझा की है बुरहानपुर जिले के शाहपुर में रहने वाले प्रगतिशील उद्यमी हर्षल लांडे ने। यह कहानी पीएमएफएमई योजना से लाभान्वित युवा की है जो अन्य युवाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत है। हर्षल लांडे ने अपनी पढ़ाई वेलिंगकर कॉलेज, मुंबई से एमबीए करके पूरी की उसके बाद उन्‍होंने करीबन पाँच साल एक बड़ी मल्टी नेशनल कंपनी में आईटी कंसल्टेंट के तौर पर काम किया।

वे कहते है कि, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, अच्छी सैलरी, आरामदायक जिंदगी और एक सुरक्षित करियर, लेकिन अंदर से हमेशा एक सवाल उठता था क्या मैं वही कर रहा हूँ जो मुझे सच में करना चाहिए। हर्षल बताते है कि, वे एक किसान परिवार से आते है, उनकेे पिता खेती और कृषि व्यवसाय से जुड़े है। बचपन से ही हर्षल ने खेतों में मेहनत, मिट्टी की खुशबू और फसल की खुशी को करीब से महसूस की है।इसी सोच के साथ युवा उद्यमी हर्षल ने अपनी नौकरी छोड़कर पोस्ट-हार्वेस्ट सेक्टर में कदम रखा। बुरहानपुर जिले में केला मुख्य फसल है और इस फसल में अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत थी सही दिशा मिलने की।

मात्र छह महीनों में 35 लाख रुपये का टर्नओवर

युवा उद्यमी हर्षल बताते है कि, एक ऐसा ब्रांड जो 100 प्रतिशत राइस ब्रान ऑयल में तले हुए केले के चिप्स बनाता है। यह हमारे उत्पाद की विशेषता है, क्योंकि राइस ब्रान ऑयल न केवल हेल्दी है, बल्कि चिप्स को हल्का और क्रिस्पी भी बनाता है। सिर्फ छह महीनों में 35 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल किया है और औसतन हर महीने एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहा हूँ।

यह सफर आसान नहीं था, लेकिन हर दिन एक नई सीख लेकर आया। हर्षल कहते है कि, मेरे लिए केला चिप्स का कारोबार सिर्फ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि किसानों से जुड़ा एक मिशन है। वे अपने इस व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहते है। केले से जुड़ी नई फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को अपनाने ताकि, और अधिक वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स बना सकें। केला चिप्स यूनिट में तैयार प्रोडक्ट्स सिर्फ मध्यप्रदेश राज्य में ही नहीं बल्कि इनका स्वाद रायपुर, हैदराबाद, पुणे, मुंबई और बैंगलुरु जैसे बड़े-बड़े शहरों तक भी पहुंच चुका है।

योजना से मिली दिशा, मेहनत लायी रंग

इस सफलता की नींव में शासन का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से लाभार्थी हर्षल लांडे को यूनिट स्थापना के लिये पीएमएफएमई योजना के तहत 10 लाख रुपये का अनुदान मिला, इससे केला चिप्स यूनिट स्थापना में मदद मिली।

स्वाद और रोजगार का संगम

31 वर्षीय युवा उद्यमी हर्षल आज एक सफल उद्यमी के रूप में अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम बन पाये है। केला चिप्स यूनिट में करीबन 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यूनिट में रेगुलर, टोमेटो, पेरी-पेरी, क्रीम ओनियन, सॉल्टेड और पुदीना आदि 6 प्रकार के फ्लेवर्स के चिप्स बनाये जाते है।

सपनों को बदला हकीकत में

प्रदेश के युवाओं में अपार प्रतिभाएं है यदि उन्हें सही दिशा एवं अवसर मिले तो वे उँचाइयों तक पहुँच सकते है। यह कहानी आत्मनिर्भर भारत की पहचान है।

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