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madhyapradesh के इस जिले में किसानों ने क्यों किया आंखो में काली पट्टी बांध कर किया धृतराष्ट्र आंदोलन

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madhyapradesh के burhanpur जिले के आदिवासी ब्लॉक खकनार में नि्र्माणाधीन पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना में जिन किसानों की जमीन डूब में आ रही है ऐसे करीब 300 किसान पिछले तीन साल से सरकार से उचित मुआवजा भुगतान की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे है इन्ही किसानों ने रविवार को आंखो में काली पट्टी बांधकर धृतराष्ट्र आंदोलन कर सरकार से उनकी डूब में आ रही जमीन का दोगुना मुआवजा व सांत्वना राशी भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन किया
अपनी मांग को लेकर तीन गांव पांगरी, नागझिरी और बसाली के किसानों व आदिवासियों ने आंखो में काली पट्टी बांधकर आंदोलन किया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार से जल्द उनकी जमीन का दोगुना मुआवजा व सांत्वना राशी भुगतान की मांग की
आंदोलन की अगुवाई कर रहे डॉ रवि पटेल ने बताया प्रभावित किसान पिछले तीन साल से लोकतांत्रिक व गांधीवादी ढंग से सत्याग्रह करके अपनी मांग करते चले आ रहे है लेकिन सरकार किसानों की कोई सुनवाई नहीं कर रही है उन्होने कहा किसानों व ग्रामीणों को भ्रमित करके दोगुना मुआवजा देने का वादा करके परियोजना का काम शुरू कर दिया गया लेकिन परियोजना का काम शुरू होते ही सरकार अपने वादे से पलट गई उन्होंने बताया भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्र दो गुना मुआवजा देने का प्रावधान है बावजूद इसके कानून का उल्लंघन किया जा रहा है डॉ रवि पटेल ने चेतावनी दी है कि सरकार उनकी मांग को जल्द पूरा नहीं करती है तो किसानों को उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पडेगा

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क्या है पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना

बुरहानपुर जिले के आदिवासी ब्लॉक खकनार में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना को 2022 में प्रशासकीय मंजूरी मिली थी 145.10 करोड लागत से बन रही इस परियोजना में 4400 हेक्टयर क्षेत्र में सिंचाई होगी इस परियोजना में करीब 300 किसानों की लगभग 287 हेक्टयर जमीन डूब में आएंगी
पंचायत ने 10 लाख रूपए हेक्टयर मुआवजा तय किया था लेकिन किसानों ने भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 15 लाख रूपए हेक्टयर से अधिक मुआवजा भुगतान की मांग रखी
नवंबर 2023 में डूब प्रभावित किसानों ने राष्ट्रपति को सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगते हुए पत्र भेजे थे उसके बाद किसानों ने केले के खेतों में शीर्षासन आंदोलन इसके बाद पत्थर खाओ आंदोलन भी किया था किसानों और जिला प्रशासन के बीच कई दौर की बैठके हुई इन बैठकों में 17 लाख रूपए प्रति हेक्टयर मुआवजा भुगतान की सहमति बनी लेकिन किसानों का आरोप है इस मान से मुआवजा भुगतान नहीं हुआ

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