Tuesday, July 28, 2026
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burhanpurnews,नशा निवारण दिवस पर नुक्कड़ नाटक “नशा लोक का अंत” का मंचन

burhanpurnews, madhyapradesh के burhanpur  बुरहानपुर* – अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर अर्वाचीन स्कूल में सर्व सेवा संकल्प समिति एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से नशे पर आधारित नुक्कड़ नाटक “नशा लोक का अंत” का मंचन किया गया, जो दर्शकों के बीच नशे के दुष्परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाला था।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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burhanpurnews, madhyapradesh के burhanpur  बुरहानपुर* – अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर अर्वाचीन स्कूल में सर्व सेवा संकल्प समिति एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से नशे पर आधारित नुक्कड़ नाटक “नशा लोक का अंत” का मंचन किया गया, जो दर्शकों के बीच नशे के दुष्परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाला था।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल ने नशे के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हर अपराध की जड़ में नशा ही होता है।”

ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

कार्यक्रम में अर्वाचीन स्कूल की डायरेक्टर श्रीमती राखी मिश्रा ने नशे को समाज की एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा, “यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देता है।”

नुक्कड़ नाटक में व्यसन राज और उसके असुर साथी जैसे पान, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और शराब का धरती पर आतंक दिखाया गया और अंत में यह संदेश दिया गया कि कैसे लोग इन नशों से मुक्त होकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नशे पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। विभिन्न सहयोगियों को प्रमाणपत्रों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. मनोज अग्रवाल, मंगला दीदी, राखी मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री सोलंकी, समाजसेवी महेंद्र पारीक, बीके स्वाति दीदी समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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ब्रह्माकुमारी मंगला दीदी ने नशे को एक धीमे जहर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा, “यह शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को मृत्यु के करीब ले आता है।”

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