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sancharsathiजानिए संचार साथी ऐप विवाद पर क्या कहा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने

Spiritual Clinic मप्र के बुरहानपुर में है एक अनूठा स्पिरिचुअल क्लिनीक रेडिएंट हीलिंग हब जहां एक छत के नीचे सात आध्यात्मिक विधाओ से मप्र की सब से कम उम्र की लाईफ ट्रेनर सिध्दि बरोले से मिलता है समस्याओं का समाधान

क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

पूराने स्मार्ट फोनों के लिए निर्देश?

दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

Burhanpur Mawa Jalebi : बुरहानपुर की मशहुर मावा जलेबी खरीदने की ग्राहकों की पहली पसंद बनता जा रहा मुश्ताक मावा जलेबी सेंटर

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Spiritual Clinic मप्र के बुरहानपुर में है एक अनूठा स्पिरिचुअल क्लिनीक रेडिएंट हीलिंग हब जहां एक छत के नीचे सात आध्यात्मिक विधाओ से मप्र की सब से कम उम्र की लाईफ ट्रेनर सिध्दि बरोले से मिलता है समस्याओं का समाधान

क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

पूराने स्मार्ट फोनों के लिए निर्देश?

दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

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दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

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दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

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केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

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विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
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दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

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दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

पूराने स्मार्ट फोनों के लिए निर्देश?

दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

Burhanpur Mawa Jalebi : बुरहानपुर की मशहुर मावा जलेबी खरीदने की ग्राहकों की पहली पसंद बनता जा रहा मुश्ताक मावा जलेबी सेंटर

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sancharsathiजानिए संचार साथी ऐप विवाद पर क्या कहा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने

Spiritual Clinic मप्र के बुरहानपुर में है एक अनूठा स्पिरिचुअल क्लिनीक रेडिएंट हीलिंग हब जहां एक छत के नीचे सात आध्यात्मिक विधाओ से मप्र की सब से कम उम्र की लाईफ ट्रेनर सिध्दि बरोले से मिलता है समस्याओं का समाधान

क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

पूराने स्मार्ट फोनों के लिए निर्देश?

दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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क्या है खबर?

संचार साथी ऐप पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है खबरों के मुताबिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता नए स्मार्टफोन में पूर्व से इंस्टॉल इस ऐप को अनइंस्टॉल नही कर पाएंगे लेकिन इस मामले में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कहा है कि इस ऐप को रखना या नहीं रखना पूरी तरह स्मार्टफोन यूजर्स की रूचि पर निर्भर रहेगा और यह ऐप हमेशा यूजर्स के स्मार्टफोन में नहीं रह पाएंगा

क्या कहा संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संचार साथी ऐप के विवाद के बाद अपने दिए बयान में कहा अगर आप संचार साथी नहीं चाहते है तो आप इसे डिलीट कर सकते है यह पूरी तरह वैकल्पिक है उन्होने कहा सरकार का दायित्व केवल इतना सुनिश्चित करना है कि ऐप फोन सेटअप के समय दिखे ताकि नागरिक चाहे तो इसका उपयोग सकें उन्होने कहा यूजर्स को ऐप थोपने की सरकार की मंशा नहीं है

निजता विवाद के बाद आई सरकार की सफाई

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संचार साथी ऐप को लेकर बयान उस समय आया जब स्मार्टफोन कंपनियों को ऐप प्रीलोड करने के निर्देश के बाद निजता को लेकर विवाद बढ गया था
विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोलते हुए इससे नागरिकों की निजता हनन और नागरिकों की निगरानी की आशंका जताई इस पर केंद्र सरकार ने कहा ऐप का मकसद केवल नागरिकों को नकली फोन, चोरी हुए डिवाईस और फर्जी ठगी के कॉल से बचाना है मंत्री सिंधिया ने दोहराया है कि ऐप पूरी तरह ऑब्शनल है और इसे ऱखना जरूरी नहीं है

ऐप को लेकर क्या है विवाद ?

दरअसल संचारी साथी ऐप को लेकर विवाद उस समय बढा जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया सरकार ने सभी स्मार्ट फोन कंपनियों को यह ऐप अब हर नए फोन में इनबिल्ट इंस्टॉल करने का आदेश दिया है और नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ता इसे ना तो हटा पाएंगे और ना ही अनुपयोगी सूची में डाल पाएंगे इस दावे पर प्रमुख विपक्षी दल ने इसे पेगासस का हवाला देते हुए कहा यह नागरिकों की निजता और डाटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है

दूसंचार विभाग ने स्मार्टफोन कंपनियों को जारी किए दिशा निर्देश

दूरसंचार विभाग के मुताबिक सभी ऩए स्मार्टफोनों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए और फोन के पहले सेटअप में ही साफ दिखाई देना चाहिए
कंपनियों को यह भी सुनिश्चित कना होगा की ऐप पूरी तरह से काम करे और इसकी किसी भी सुविधा को बंद या सीमित नहीं किया जाए
दूरसंचार विभाग ने कहा है कि कंपनियां इन नए नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू करें और 120 दिनों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करें

पूराने स्मार्ट फोनों के लिए निर्देश?

दूर संचार विभाग ने कहा है जो फोन पहले से बन चुके है और बाजार में मौजूद है उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए संचार साथी ऐप भेजने के प्रयास करने होंगे
विभाग के अनुसार यह ऐप आईएमईआई नंबर से फओन की असलियत जांचता है चोरी हुए फोन को ब्लॉक कराता है और ठगी के फोन कॉल या मैसेज की शिकायत करने में सहायता करता है नकली या बदले हुए आईएमईआई साइबर सुरक्षा के लिए बडा खतरा है

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