Friday, May 15, 2026
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burhanpurnewsसंविधान प्रगतिशील राष्ट्र की नींव-अर्चना चिटनिस

burhanpurnewsबुरहानपुर। देशभर में संविधान दिवस के अवसर पर बुरहानपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, कलेक्टर हर्षसिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ.मनोज माने, जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, आशीष शुक्ला, गजेन्द्र पाटिल, किशोर कामठे, ईश्वर चौहान, गौरव शिवहरे, राजकुमार वाघ एवं संतोष गवई सहित अन्य जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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burhanpurnewsबुरहानपुर। देशभर में संविधान दिवस के अवसर पर बुरहानपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, कलेक्टर हर्षसिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ.मनोज माने, जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, आशीष शुक्ला, गजेन्द्र पाटिल, किशोर कामठे, ईश्वर चौहान, गौरव शिवहरे, राजकुमार वाघ एवं संतोष गवई सहित अन्य जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
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कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
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कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
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श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
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कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
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श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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burhanpurnewsसंविधान प्रगतिशील राष्ट्र की नींव-अर्चना चिटनिस

burhanpurnewsबुरहानपुर। देशभर में संविधान दिवस के अवसर पर बुरहानपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, कलेक्टर हर्षसिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ.मनोज माने, जिला पंचायत सीईओ सृजन वर्मा, आशीष शुक्ला, गजेन्द्र पाटिल, किशोर कामठे, ईश्वर चौहान, गौरव शिवहरे, राजकुमार वाघ एवं संतोष गवई सहित अन्य जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माताओं को नमन तथा संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन के साथ हुई। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए भारतीय संविधान के इतिहास, महत्व और निर्माण प्रक्रिया पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला। संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत बहस, विचार-विमर्श और अध्ययन के उपरांत विश्व के सबसे व्यापक और समावेशी संविधान का निर्माण किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि आज के ही दिन 1949 में संविधान निर्माताओं के अद्भूत ज्ञान, दूरदृष्टि और परिश्रम से हमंे ऐसा महाजन संविधान मिला, जो न्याय, समानता, बंधुत्व और हर नागरिक की गरिमा की गारंटी देता है। ‘‘हम भारत के लोग‘‘ हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित वह भावना है, जो राष्ट्रीय एकता और जन कल्याण के संकल्प को मजबूत करती है। विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने वाले दुनिया के सबसे बड़े संविधान पर हर भारतवासी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी की पावन स्मृतियों को नमन और संविधान दिवस की हार्दिक बधाई।

श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय संविधान विश्व की सर्वोत्तम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है। यह हमें समान अधिकार, समान अवसर और न्यायपूर्ण समाज की दिशा देता है। संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय चरित्र, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों का संरक्षक है। आज का दिन हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन करने की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि संविधान की आत्मा को समझना और उसे व्यवहार में लाना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र का सम्मान है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रख्यात राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी रचना का वाचन किया, जिसने समारोह के वातावरण को ऊर्जा, देशभक्ति और संवैधानिक चेतना से भर दिया। कविता की पंक्तियाँ- “भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है३ जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है”। सभागार में उपस्थित सभी लोगों में एकता, नैतिकता और राष्ट्रीय चरित्र के प्रति नई प्रेरणा जगाती रहीं।
कलेक्टर हर्षसिंह ने कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमें मौलिक अधिकार देता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की भी स्पष्ट रूप से याद दिलाता है। इस अवसर पर सभा ने संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी माननीय संविधान-निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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