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पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई ड्रिप सिंचाई तकनीक, कम लागत में 3 महीने में हासिल किया 500 क्विंटल तरबूज का रिकॉर्ड उत्पादन
Water Conservation Farmingबुरहानपुर:खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले किसानों के लिए पानी की हर एक बूंद बेहद कीमती होती है। जब यही पानी आधुनिक तकनीक के जरिए सीधे फसलों की जड़ों तक सही मात्रा में पहुंचता है, तो खेती की लागत कम होने के साथ-साथ उपज और आमदनी में भी बड़ा इजाफा होता है। बुरहानपुर जिले के प्रगतिशील किसान किरण पाटिल ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ लेकर इस बात को सच कर दिखाया है।
पारंपरिक खेती से आधुनिक ड्रिप तकनीक तक का सफर
किसान किरण पाटिल बताते हैं कि उनका परिवार सालों से पारंपरिक तरीके से कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की खेती करता आ रहा था। ड्रिप सिंचाई की सुविधा न होने के कारण सिंचाई, उर्वरक और मजदूरी पर बहुत भारी खर्च आता था। कम मुनाफा होने से परिवार के भरण-पोषण में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इसी बीच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उनके खेत का दौरा किया और उन्हें ड्रिप सिंचाई के माध्यम से केला, तरबूज और हल्दी जैसी व्यावसायिक फसलें उगाने की सलाह दी। साथ ही, योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की भी जानकारी दी।
61 हजार रुपये का मिला अनुदान
अधिकारियों के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर किरण पाटिल ने उद्यानिकी विभाग के माध्यम से आवेदन किया। योजना के तहत उन्हें 1 हेक्टेयर भूमि में ड्रिप सिंचाई संयंत्र (Drip System) स्थापित करने के लिए 61 हजार रुपये से अधिक का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ। अनुदान की मदद से उन्होंने तुरंत अपने खेत में ड्रिप सिस्टम लगवाया और खेती करने का तरीका बदल दिया।
तरबूज की बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा
किरण पाटिल ने ड्रिप सिंचाई के जरिए अपने एक हेक्टेयर खेत में तरबूज की फसल लगाई। मात्र 3 महीने के भीतर उन्हें 500 क्विंटल तरबूज का रिकॉर्ड उत्पादन मिला, जिसे उन्होंने 1000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बाजार में बेचा। तरबूज के अलावा अब वे ड्रिप तकनीक से ही केला और हल्दी जैसी फसलों की भी सफल खेती कर रहे हैं।
किरण बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी, खाद और मजदूरी तीनों में भारी बचत हो रही है। इस योजना ने उन्हें नई तकनीक अपनाने और खेती को लाभ का धंधा बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है।




