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asaduddinowaisiखंडवा एसपी को एफआईआर पर नसीहत देने पर सांसद असद उद्दीन ओवेसी पर खंडवा के बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटील का पलटवार

यह खबर भी जरूर पढे – सांसद खेल महोत्सव को लेकर आयोजित बैठक में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कहा हर गांव-गली से तलाशी जाएंगी प्रतिभाएं राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का अवसर

asaduddinowaisiबुरहानपुर। मध्य प्रदेश के खंडवा में एसपी मनोज राय द्वारा एक मस्जिद कमेटी द्वारा बिहार से एक इमाम को नियुक्त करने और इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं देने पर मस्जिद कमेटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है इस मामले में अब सियासत शुरू हो गई है हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने खंडवा एसपी की इस कार्यवाही पर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने एसपी से पूछा संविधान का आर्टिकल 19 बड़ा है या bns की धारा 223 बड़ी है इस मामले में खंडवा की बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने अपनी मिली जुली प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा प्रशासन ने सोच समझकर कार्रवाई की होगी सांसद असद उद्दीन उद्दीन ओवैसी हमेशा आग में घी का काम करते हैं जातिगत राजनीति करते हैं जब कि बीजेपी सबके साथ न्याय करती है उन्होंने कहा अगर एफआईआर गलत होगी तो कोर्ट के रास्ते खुले हैं कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा

क्या था मामला

दरअसल बीते शनिवार 08 सितम्बर को खंडवा जिले की खालवा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम खारकला की मस्जिद में एक व्यक्ति अख्तर रजा पिता बदरूददीन निवासी बिहार से यहां आकर रह रहा है . पुलिस के अनुसार उसे मस्जिद के सदर मोहम्मद हनीफ खान के द्वारा नमाज पढ़ाने हेतु वहां रखा गया था.

इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

यह खबर भी जरूर पढे – जर्जर रोड की समस्या को लेकर रोड पर उतरी रविंद्र – रिंकू की कांग्रेस सेना !

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asaduddinowaisiबुरहानपुर। मध्य प्रदेश के खंडवा में एसपी मनोज राय द्वारा एक मस्जिद कमेटी द्वारा बिहार से एक इमाम को नियुक्त करने और इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं देने पर मस्जिद कमेटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है इस मामले में अब सियासत शुरू हो गई है हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने खंडवा एसपी की इस कार्यवाही पर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने एसपी से पूछा संविधान का आर्टिकल 19 बड़ा है या bns की धारा 223 बड़ी है इस मामले में खंडवा की बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने अपनी मिली जुली प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा प्रशासन ने सोच समझकर कार्रवाई की होगी सांसद असद उद्दीन उद्दीन ओवैसी हमेशा आग में घी का काम करते हैं जातिगत राजनीति करते हैं जब कि बीजेपी सबके साथ न्याय करती है उन्होंने कहा अगर एफआईआर गलत होगी तो कोर्ट के रास्ते खुले हैं कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा

क्या था मामला

दरअसल बीते शनिवार 08 सितम्बर को खंडवा जिले की खालवा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम खारकला की मस्जिद में एक व्यक्ति अख्तर रजा पिता बदरूददीन निवासी बिहार से यहां आकर रह रहा है . पुलिस के अनुसार उसे मस्जिद के सदर मोहम्मद हनीफ खान के द्वारा नमाज पढ़ाने हेतु वहां रखा गया था.

इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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क्या था मामला

दरअसल बीते शनिवार 08 सितम्बर को खंडवा जिले की खालवा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम खारकला की मस्जिद में एक व्यक्ति अख्तर रजा पिता बदरूददीन निवासी बिहार से यहां आकर रह रहा है . पुलिस के अनुसार उसे मस्जिद के सदर मोहम्मद हनीफ खान के द्वारा नमाज पढ़ाने हेतु वहां रखा गया था.

इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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asaduddinowaisiबुरहानपुर। मध्य प्रदेश के खंडवा में एसपी मनोज राय द्वारा एक मस्जिद कमेटी द्वारा बिहार से एक इमाम को नियुक्त करने और इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को नहीं देने पर मस्जिद कमेटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है इस मामले में अब सियासत शुरू हो गई है हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने खंडवा एसपी की इस कार्यवाही पर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने एसपी से पूछा संविधान का आर्टिकल 19 बड़ा है या bns की धारा 223 बड़ी है इस मामले में खंडवा की बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने अपनी मिली जुली प्रतिक्रिया दी है उन्होंने कहा प्रशासन ने सोच समझकर कार्रवाई की होगी सांसद असद उद्दीन उद्दीन ओवैसी हमेशा आग में घी का काम करते हैं जातिगत राजनीति करते हैं जब कि बीजेपी सबके साथ न्याय करती है उन्होंने कहा अगर एफआईआर गलत होगी तो कोर्ट के रास्ते खुले हैं कोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा

क्या था मामला

दरअसल बीते शनिवार 08 सितम्बर को खंडवा जिले की खालवा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम खारकला की मस्जिद में एक व्यक्ति अख्तर रजा पिता बदरूददीन निवासी बिहार से यहां आकर रह रहा है . पुलिस के अनुसार उसे मस्जिद के सदर मोहम्मद हनीफ खान के द्वारा नमाज पढ़ाने हेतु वहां रखा गया था.

इस सूचना पर पुलिस मस्जिद पहुंची थी, जहां मस्जिद के सदर हनीफ, और मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले इमाम अख्तर रजा से पूछताछ की गई थी, जिसमें इमाम के वहां रहने की जानकारी 72 वर्षीय मस्जिद के सदर द्वारा थाना खालवा पर नहीं दी गई थी.

इस मामले को पुलिस ने जिला दंडाधिकारी खंडवा के द्वारा जारी किए गए बीएनएसएस की धारा 163 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन माना था . जिसके बाद इस मामले में थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंधिया के द्वारा मस्जिद के इमाम और सदर दोनों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 319/25 दर्ज किया गया था .इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में जबरदस्त आक्रोश देखा गया था, और स्थानीय मुस्लिम जन प्रतिनिधियों ने इसे ओवैसी तक पहुंचाया था. जिसके बाद ओवैसी के द्वारा अपनी सभा के दौरान खंडवा एसपी को कानून का पाठ पढ़ाते हुए इसे इमाम के मुसलमान होने पर की गयी कार्रवाई बताया है .

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