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rumali roti: भारत के किस शहर में मुगलकाल से तैयार  हो रही देश की सबसे बडे आकार की रोटी

मप्र के बुरहानपुर में मुगल शासन काल से एक विशेष तरह की रूमाली रोटी के तरह रोटी बनाए जाने की परंपरा है जिसे स्थानीय भाषा में मांडा रोटी कहा जाता है ऐसा दावा किया जाता है यह देश की सबसे बडे आकार की रोटी है और इसके कारीगर बुरहानपुर में ही पाए जाते है इस रोटी की मांग होने पर इस के कारीगर कई शहरों में स्थाई रूप से बस गए है और इसी रोटी को बनाकर अपना रोजगार चला रहे है

rumali roti:madhyapradesh के burhanpur में की बडी रूमाली रोटी मांडा रोटी ने अब बुरहानपुर की एक अलग पहचान बनाना शुरू कर दी है, बुरहानपुर में बनने वाली बडी रूमाली रोटी मांडा के स्थानीय रहवासी तो फैन है ही लेकिन बुरहानपुर में आने वाले देशी विदेशी पर्यटक इस बडी मांडा रोटी को देखकर इसके कायल हो जाते है और इस रोटी को खाए बिना नहीं रहते क्या है इस सबसे बडी रूमाली रोटी मांडा रोटी का इतिहास क्या है आईए जानते है

बुरहानपुर की प्रसिध्द रूमाली रोटी मांडा का इतिहास

मप्र का ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर, बुरहानपुर का इतिहास जितना पूराना है उतना ही पूराना यहां बनने वाली रोटी के  आकार से भी बडी मांडा रोटी का इतिहास है  मुगलकाल से शुरू हई इस मांडा रोटी के शहर में 60 से अधिक परिवार है जिनके लगभग 500 सदस्य मांडा रोटी से ही अपना जीवन यापन करते है इतिहास के जानकार मोहम्मद नौशाद के अनुसार 1601 में मुगलशासन आया तब मुगल शासकों ने बुरहानपुर को फौजी छावनी बनाई मुगल शासन के भारत वर्ष में सैनिक बुरहानपुर फौजी छावनी  में आाया करते थे ऐसे में कम समय में अधिक मात्रा में भोजन तैयार करने का संकट खडा  हो गया इस बीच स्थानीय कारीगरों ने मुगल शासको को कम समय में अधिक मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए स्थानीय बावरचियों ने बडे आकार की रोटी यानी मांडा बनाने का सुझाव दिया जिसे स्वीकर किया गया युध्दस्तर पर  मांडा रोटी तैयार करने का फऱमान जारी हुआ मोहम्मद नौशाद  के अनुसार मुगलशासन काल में एक मांडे रोटी ढाई बाय के आकार में करीब 500 ग्राम गेंहुं के आटे में तैयार की जाती थी वर्तमान में मांडा रोटी का आकार घटने के बाद यह मांडा रोटी पूरे देश में सबसे बडे आकार की  रोटी  है मांडा रोटी अन्य रोटियों की तुलना में काफी स्वादिष्ट और किफायती है खास बात यह है कि बुरहानपुर के हर वर्ग के लोग इस मांडा रोटी का बडे चाउ से अपने भोजन में सेवन करते  है मोहम्मद नौशाद  का दावा है सबसे बडे आकार की रोटी मांडा रोटी  एक किलो गेंहु के आटे में 4 पीस बनकर तैयार होती है

सबसे बडी रूमाली रोटी मांडा रोटी अब बुरहानपुर की धरोहर बन गई है

बुरहानपुर के पूराने बस स्टैंड के सामने मांडा रोटी बनाने वालों की दुकान है  और यह लोग कई पीढियों से इस काम को करते चले आ रहे है चूंकि इस काम में काफी मेहनत होने के चलते मांडा बनाने वाले कारीगरों की नई पीडियो इस पेशे से तौबा कर रहे है जबकि मांडा तैयार करने वाले कारीगरों से आटे को मिक्स करने के लिए मिक्सर जैसे संसाधन आ चुके है मांडा बनाने वाले कारीगरों के अनुसार उनके ही कारीगर मांडा रोटी बनाने अरब देशो, श्रीलंका, नेपाल  आदि देशों में मांडा रोटी बनाने के लिए जाते है वहीं मप्र महाराष्ट्र गुजरात प्रदेशो में जाते है बुरहानपुर के अलावा कहीं भी मांडा बनाने वाले कारीगर नहीं है  यहां तक महाराष्ट्र मप्र व गुजरात के कई शहरों में मांडा रोटी बनाने का कारोबार करने के लिए बुरहानपुर के कारीगर स्थाई रूप से इन शहरों में  शिफ्ट हो गए है

वहीं नियमित रूप से मांडा रोटी के ग्राहक चंद्र कुमार छापडिया  इस रोटी की तारिफ करते नहीं थकते है

उनका कहना है छोटे से लेकर बडे आयोजन तक मांडा रोटी की काफी मांग होती है लोग यहां तक कहते है मांडा रोटी बुरहानपुर शहर की धरोहर तो है ही लेकिन हिंदू मुस्लिम एकता गंगा जमुना संस्कृति का भी एक प्रतिक है

होटल उद्योग से जुडे पर्यटन के जानकार होशांग हवलदार  के अनुसार जब भी देशी विदेशी पर्यटक बुरहानपुर आता है तो उसे हम मांडा रोटी कैसे बनती है इसे दिखाने के लिए ले जाना नहीं भूलते, छोटे आकार की मांडा रोटी खाने वाले सैलानी मांडा रोटी को देखकर बरबस इसके दिवाने हो जाते है और बडी मात्रा मे मांडा रोटी खरीद कर इसके स्वाद का लुतफ उठाते है

 

 

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