Wednesday, June 10, 2026
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Macrovisionacadmy News :मैक्रो विज़न एकेडमी में धूमधाम से मना दशहरा: संस्कृति और आधुनिकता का संगम

 

 

Macrovisionacadmy Newsबुरहानपुर। मैक्रो विज़न एकेडमी में दशहरा का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम परंपरा, संस्कृति और आधुनिकता के समन्वय का अद्भुत उदाहरण बना। उत्सव की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जो ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है। इस समारोह ने अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश दिया और छात्रों ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

संस्थापक का प्रेरणादायक भाषण
मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

इस उत्सव में छात्रों ने न केवल अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि दशहरा के आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को भी जीवंत किया।

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Macrovisionacadmy Newsबुरहानपुर। मैक्रो विज़न एकेडमी में दशहरा का पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम परंपरा, संस्कृति और आधुनिकता के समन्वय का अद्भुत उदाहरण बना। उत्सव की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जो ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है। इस समारोह ने अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश दिया और छात्रों ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

संस्थापक का प्रेरणादायक भाषण
मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

इस उत्सव में छात्रों ने न केवल अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि दशहरा के आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को भी जीवंत किया।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

संस्थापक का प्रेरणादायक भाषण
मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

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कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

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इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

संस्थापक का प्रेरणादायक भाषण
मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
इसके बाद रामायण पर आधारित नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में आधुनिक कोरियोग्राफी का समावेश था, जिसने परंपरा और आधुनिकता का एक सुंदर संयोजन पेश किया। यह प्रदर्शन दशहरा के सार को प्रस्तुत करता है, जिसमें धर्म की बुराई पर विजय का संदेश निहित है। कार्यक्रम का समापन रावण दहन के साथ हुआ, जो दशहरा की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

संस्थापक का प्रेरणादायक भाषण
मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम और कविता की प्रस्तुति
कार्यक्रम की एंकरिंग अंश गुजर, आंचल बाथोले, महक मिहानी, उत्कर्ष सिंह, अमोघ शुक्ला, आकर्षी अग्रवाल, पियूषी शिकारी सहित अन्य छात्रों ने उत्साहपूर्वक की। छात्र तेजपाल सिंह ने अपनी मार्मिक कविता से दर्शकों को दशहरा के मूल संदेश से अवगत कराया। उनकी कविता ने यह याद दिलाया कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को गहरे रूप से प्रभावित किया।

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अहंकार पर आधारित नृत्य और आधुनिक कोरियोग्राफी
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अहंकार पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही। इस प्रदर्शन के माध्यम से कलाकारों ने विनम्रता और आत्म-सुधार के महत्व को दर्शाया। नृत्य में गर्व और विनम्रता के बीच आंतरिक संघर्ष को चित्रित किया गया, जो आत्म-सुधार की यात्रा का प्रतीक था। इस नृत्य ने सच्ची महानता को विनम्रता में निहित बताया, जिससे दर्शकों को एक गहरा संदेश मिला।

रामायण पर आधारित नृत्य और रावण दहन
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मैक्रो विज़न एकेडमी के संस्थापक श्री आनंद प्रकाश चौकसे ने अपने प्रेरणादायक भाषण में छात्रों को उनके भीतर की बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की कमजोरियों, जैसे अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है।

इस उत्सव में छात्रों ने न केवल अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि दशहरा के आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को भी जीवंत किया।

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