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jabalpurhighcourt,जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोसेस को जबलपुर हाईकोर्ट से मिला स्टे, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन बने रहेंगे

 

jabalpurhighcourt,बुरहानपुर।(हेल्थ रिपोर्टर) स्वास्थ्य विभाग द्वारा बी एम ओ बनाए जाने के बाद डॉ. प्रदीप मोसेस ने सीधे जबलपुर उच्च न्यायालय की शरण ली थी जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली हैं। गुरुवार 12.06.2025 को उच्च न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है साथ ही नोटिस जारी कर चार हफ्तों में शासन – सहित डॉक्टर दर्पण टोके से जवाब तलब किया हैं।

– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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jabalpurhighcourt,बुरहानपुर।(हेल्थ रिपोर्टर) स्वास्थ्य विभाग द्वारा बी एम ओ बनाए जाने के बाद डॉ. प्रदीप मोसेस ने सीधे जबलपुर उच्च न्यायालय की शरण ली थी जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली हैं। गुरुवार 12.06.2025 को उच्च न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है साथ ही नोटिस जारी कर चार हफ्तों में शासन – सहित डॉक्टर दर्पण टोके से जवाब तलब किया हैं।

– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
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– डॉ. प्रदीप ने शासन के स्थानांतरण आदेश दिनांक 07.06.2025 को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की हैं, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि याचिकाकर्ता से सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, वापस लेने की मांग की बुरहानपुर का प्रभार वापस गई है और उसे मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शाहपुर, जिला- बुरहानपुर के पद पर पदस्थ करने का निर्देश दिया गया है।
डॉ. प्रदीप मोसेस ने अपनी याचिका के द्वारा दिनांक 07.06. 2025 के आदेश को मुख्य रूप से इस आधार पर चुनौती दी है कि इसे प्रतिवादी संख्या 4 अर्थात डॉ. दर्पण टोके को समायोजित करने के लिए पारित किया गया है, जो याचिकाकर्ता अर्थात डॉ प्रदीप से कहीं अधिक जूनियर है तथा वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। आगे याचिका में उल्लेख किया गया हैं कि यदि विवादित आदेश को निष्पादित करने की अनुमति दी जाती है, तो याचिकाकर्ता को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जबलपुर उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश न्यायाधीश माननीय अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 कार्य दिवस की अवधि के भीतर पी.एफ. के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर देने के लिए निर्देशित किया हैं। साथ ही इस बीच, यह निर्देश भी दिए है कि दिनांक 07.06. 2025 का विवादित आदेश, जहां तक ? यह याचिकाकर्ता से संबंधित है, सुनवाई की अगली तिथि तक स्थगित रहेगा, अर्थात शासन के इस दिनांक के आदेश में अन्य चिकित्सकों के स्थानांतरन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
डॉ. प्रदीप की ओर से जबलपुर उच्च न्यायालय में पैरवी अधिवक्ता सुश्री मिनी रविन्द्रन तथा राज्य की ओर से पैरवी सरकारी अधिवक्ता श्री बी. के. उपाध्याय ने की। याचिका क्रमांक WP 20329/2025 हैं।

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