Burhanpur Newsबुरहानपुर। आज के आधुनिक और डिजिटल शिक्षा के युग में जहाँ कंक्रीट के भवनों में पढ़ाई हो रही है, वहीं बुरहानपुर जिले के शाहपुर स्थित सांदीपनि विद्यालय में प्राचीन भारतीय गुरुकुल परंपरा की जीवंत तस्वीर देखने को मिल रही है। यहाँ स्कूली बच्चे आधुनिक क्लासरूम के साथ-साथ परिसर में स्थित 100 साल पुराने विशालकाय बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ज्ञान अर्जन कर रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण की अनुकरणीय मिसाल
इस विद्यालय के निर्माण के लिए नगर के उदारमना देशमुख परिवार ने अपनी 6 एकड़ कृषि भूमि दान में दी थी। यहाँ ‘सीएम राइज स्कूल’ योजना के तहत आधुनिक भवन निर्माण प्रस्तावित हुआ। शुरुआत में निर्माण एजेंसी द्वारा इस 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को काटने की योजना बनाई गई थी। लेकिन पर्यावरण प्रेमी और विद्यालय के शिक्षकों ने पेड़ बचाने का आग्रह किया।
संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्माण एजेंसी के आर्किटेक्ट ने भवन की डिजाइन में ऐसा बदलाव किया कि पेड़ बिना कटे सुरक्षित रह गया। आज यह विशाल बरगद का पेड़ न केवल स्कूल परिसर की शोभा बढ़ा रहा है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए एक खुला, प्राकृतिक क्लासरूम बन चुका है।
सांदीपनि आश्रम और गुरुकुल परंपरा की याद
बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते बच्चों का दृश्य उज्जैन के ऐतिहासिक सांदीपनि आश्रम का स्मरण कराता है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने शिक्षा ग्रहण की थी। शिक्षिका प्रियंका रवींद्र और प्राचार्य सैय्यद अतीक अली के अनुसार, बरगद के पेड़ की छांव में पढ़ाई करने से बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता में अद्भुत वृद्धि देखी जा रही है। छात्रा माधुरी समाधान और सानिया तड़वी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रकृति की गोद में पढ़ाई करना काफी सुखद और तनावमुक्त रहता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रकृति और पर्यावरण का महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में भी पर्यावरण-आधारित और समग्र शिक्षा (Holistic Learning) पर बल दिया गया है। सांदीपनि विद्यालय का यह प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देता है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए पर्यावरण का विनाश अनिवार्य नहीं है। बुरहानपुर का यह मॉडल राज्य और देश के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है।




