Tuesday, July 28, 2026
Burhānpur
moderate rain
26.9 ° C
26.9 °
26.9 °
83 %
4.1kmh
100 %
Tue
27 °
Wed
26 °
Thu
28 °
Fri
26 °
Sat
23 °

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

Rajasthan Festival : राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan Festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में चार दशक से टेक्सटाईल का व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया

माहेश्वरी समाज Maheshwari Samaj के बजरंग तापडिया ने बताया भारतीय संस्कृति Indian Culture  के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान Rajasthan State  की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी

माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है माहेश्वरी समाज की ऐसी महिला जिनकी अभी शादी हुई उन्होने शादी के बाद पहली बार तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

 

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles