Kishore Kumar Songs Tributeबुरहानपुर: भारतीय संगीत जगत के अमर हस्ताक्षर और अपनी बहुमुखी प्रतिभा से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले महान गायक स्व. किशोर कुमार की पुण्यतिथि के अवसर पर बुरहानपुर में एक भव्य और भावुक संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘तेरे सुर मेरे गीत संगीत समिति’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने किशोर दा के सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियाँ देकर उन्हें स्वरांजलि अर्पित की और उपस्थित श्रोताओं को पुराने ज़माने की यादों में ले गए।
अतिथियों ने किशोर दा के चित्र पर किया माल्यार्पण
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों—प्रसिद्ध समाजसेवी सतीश अग्रवाल, वरिष्ठ कवि रमेशचन्द्र शर्मा ‘धुआँधार’, समाजसेवी सुदामा इंगले एवं रोटी बैंक संचालक संजय शिंदे द्वारा किशोर कुमार के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों ने किशोर दा के भारतीय संगीत में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके गाए गीत आज भी हर पीढ़ी को मंत्रमुग्ध करते हैं।
सुरीली प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
इसके पश्चात समिति के गायकों ने एक से बढ़कर एक एकल (Single) और युगल (Duet) गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं। किशोर दा की मखमली आवाज़ और चुलबुले अंदाज़ वाले गानों को जब स्थानीय कलाकारों ने मंच पर उतारा, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विशेष रूप से कलाकार विश्वास अग्रवाल की प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। छोटे से शहर बुरहानपुर में छिपी ऐसी सुरीली प्रतिभाओं को सुनकर उपस्थित नागरिक और अतिथि अचंभित रह गए।
समिति पदाधिकारियों ने अतिथियों का किया स्वागत
कार्यक्रम के दौरान समिति के संयोजक सुनील सलुजा, अध्यक्ष राज भावसार, उपाध्यक्ष सुमित गुप्ता व वर्षा अग्रवाल, सचिव वीरेंद्र मिश्रा, प्रचार मंत्री अज़हर हसन, सागर मोदी, मंजु लखोटिया, माधुरी पंडित, संतोष जाधव, संतोष महाजन और सतीश गुजराती ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
अगले माह शहर में होगा भव्य संगीतमय आयोजन
समिति के अध्यक्ष राज भावसार ने इस अवसर पर जानकारी दी कि संगीत प्रेमियों के उत्साह को देखते हुए अगले माह बुरहानपुर शहर में एक और भव्य गीतों के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का सफल संचालन सुमित गुप्ता ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सचिव वीरेंद्र मिश्रा द्वारा किया गया।
संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का माध्यम है। बुरहानपुर में आयोजित यह कार्यक्रम साबित करता है कि कालजयी कलाकार कभी मरते नहीं, वे अपने संगीत के ज़रिए हमेशा अमर रहते हैं।




