goodnewsबुरहानपुर – बुरहानपुर में ऐतिहासिक मुगलकालीन 400 साल पूरानी विश्व प्रसिध्द भूमिगत जल संरचना कुंडी भंडारा को मप्र सरकार व्दारा पुनर्जीवित करने की तैयारी
GoodNews बुरहानपुर में 400 साल पहले मुगलकालीन समय में स्थानीय सूबेदार रहे अब्दुल रहीम खान खाना ने सतपुडा की पहाडी पर भूमिगत जल संरचना कुंडी भंडारा को विकसित कर उस समय 4 से 5 किलोमीटर की परिधि में बिना बिजली बिना पंप जमीन में 80 फीट नीचे और 108 कुंडियों की मदद से जल प्रवाहित करने की संरचना तैयार की थी जिससे हजारों लोगो को शुध्द पीने का पानी मिलता था इस ऐतिहासिक धरोहर को यूनेस्को ने भी अपनी नामांकित सूची में अंकित किया है
मप्र सरकार व्दारा धऱोहर को पुनर्जीवित संरक्षित करने की तैयारी
goodnewsअब मप्र सरकार जल समस्या को दूर करने के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर का सहारा लेने की तैयारी कर रही है पुरातत्व निदेशालय व भोपाल के मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) की टीम को इसका चुंबकीय सर्वे व अऩ्य सर्वे कर इसे पुनर्जीवित करने के लिए रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा है
जानकारो ने बताया कि MANIT के एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट मिलने के बाद ज़मीन पर बहाली का काम शुरू कर दिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ बुरहानपुर की पानी की सप्लाई को मजबूत करेगा, बल्कि देश भर में वाटर कंजर्वेशन और क्लाइमेट रेजिडेंस के लिए एक नया मॉडल भी पेश करेगा।
इतिहास के जानकारों के अनुसार यह अद्भुत अंडरग्राउंड नेटवर्क साल 1615 में मुगल गवर्नर अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के कार्यकाल के दौरान जहांगीर के राज में फारसी कनात पद्धति के आधार पर तैयार किया गया था। इस सिस्टम में लगभग 4 किलोमीटर लंबी भूमिगत गैलरी से जुड़े 108 से वर्टिकल शाफ्ट शामिल हैं। जिन्हे स्थानीय भाषा में कुंडिया कहा जाता है हैरानी की बात यह है कि बिना किसी पंप या बिजली के यह पानी प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण की ताकत से पूरे बुरहानपुर शहर तक पहुंचता था। सदियों की उपेक्षा और अतिक्रमण के बावजूद इस सिस्टम के कई हिस्से आज भी सुरक्षित बचे हुए हैं।
मप्र शासन की इस पहल से स्थानीय नागरिकों को अब यह उम्मीद जगी है कि विश्व प्रसिध्द कुंडी भंडारा को अपना गौरव मिलेगा साथ ही इसका शुध्द पीने का पानी पहले की तरह हजारों लोगो की प्यास बुझाएगा






