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VULTURE मप्र के दमोह के मड़ियादो बफर में दिख रहे लुप्तप्राय प्रजाती के गिद्ध

VULTURE दमोह(एजेंसी) जिले के मडिय़ादो बफर जोन के जंगल में विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों व पक्षियों के साथ दुर्लभ प्रजाति के जीव भी देखने को मिल रहे है जो प्राकृति के संतुलन को बनाये रखने के साथ साथ पर्यावरण प्रेमियों के लिए सुखद खबर है। इन गिद्धों में लाल सिर के गिद्ध भी देखने को मिल रहे हैं जो लगभग लुप्त से हो गए हैं,
जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


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जानकारी के अनुसार 1990के दशक के बाद से हर दूसरे साल अनिवार्य रूप से इन लाल सिर के गिद्धों की आबादी आधी हो रही थी। और जो कभी सैकड़ो हजारों की सख्या में बहुतायत में थी,वह दो दशकों से भी कम समय में खतरनाक रूप से विलुप्त होने के करीब आ गई । नतीजतन इसे वर्ष 2007 में आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया था।


इसके बाद सफेद, काले और अन्य प्रजाति के गिद्धों की सख्या में भी लगातार कमी देखी गई जिसका मुख्य कारण वैज्ञानिकों के द्वारा मवेशियों पर डाईक्लोफैनिक दवाएं के स्तेमाल के बाद मृत हुए पशुओं के माश भक्षण करने के बाद बाद गिद्धों की प्रजाती को तेजी से नुकसान हुआ और गिद्धों की सख्या में तेजी से कमी आई लेकिन डाईक्लोफैनिक दवाओं पर प्रतिबंध होने के बाद अब गिद्धों की सख्या में इजाफा देखने मिल रहा है जो पर्यावरण के लिए सुखद खबर है।

 

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