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Pmmodiapeal:PM मोदी की अपील का बुरहानपुर में अनोखा असर: नया गोल्ड खरीदने की बजाय बुजुर्गों के पुराने सोने को ‘रीमेक’ करा रहे लोग

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सराफा बाजार में दिखा मिला-जुला रुख: निवेशकों ने एक साल के लिए टाली खरीदी, तो महिलाओं का कहना— ‘कम खरीदेंगे, पर शादी-ब्याह में सोने के बिना काम नहीं चलेगा’


Pmmodiapealबुरहानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ‘एक साल तक नया सोना नहीं खरीदने’ की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के सराफा बाजार में इस अपील का एक बेहद दिलचस्प और आंशिक (मिला-जुला) असर देखने को मिल रहा है। बाजार में लोग देशहित में प्रधानमंत्री की बात का मान भी रख रहे हैं और परंपराओं को भी निभा रहे हैं। लोग शादियों के इस सीजन में नया सोना खरीदने की बजाय अपनी तिजोरियों में रखे बुजुर्गों के पुराने आभूषणों को दुकानदारों के पास लाकर उन्हें ‘रीमेक’ (नया डिजाइन) करवा रहे हैं।

बुजुर्गों की पूंजी आ रही काम, निवेशकों ने खींचे हाथ

स्थानीय सराफा व्यापारियों के अनुसार, पीएम मोदी की इस अपील का बाजार पर सकारात्मक लेकिन आंशिक असर है। जो लोग केवल निवेश (Investment) के मकसद से सोना खरीदते थे, उन्होंने फिलहाल एक साल के लिए अपनी खरीदी पूरी तरह टाल दी है। वहीं, जिन परिवारों में शादियां हैं, वे सराफा दुकानों पर पुराना सोना लेकर पहुंच रहे हैं। तिजोरियों में बरसों से रखे पुराने दौर के भारी और पारंपरिक गहनों को गलाकर आज के दूल्हा-दुल्हन की पसंद के हिसाब से आधुनिक लाइटवेट आभूषण तैयार करवाए जा रहे हैं। इससे ग्राहकों पर नया पैसा खर्च करने का बोझ भी नहीं पड़ रहा है और बाजार में काम भी चल रहा है।

क्या कहते हैं सराफा कारोबारी?

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सौरभ श्रॉफ (सराफा कारोबारी) – “पीएम मोदी की अपील का मार्केट पर आंशिक असर जरूर हुआ है। बड़े निवेशक अभी बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि, शादियों का सीजन होने के कारण काम बंद नहीं हुआ है, बल्कि ट्रेंड बदल गया है। लोग नया सोना न खरीदकर अपने बुजुर्गों के सोने को रीमेक करवा रहे हैं। इससे कारीगरों को भी काम मिल रहा है और ग्राहकों की जरूरत भी पूरी हो रही है।”

महिलाओं का तर्क: ‘सोने के बिना अधूरा है शुभ प्रसंग’

दूसरी तरफ, घरेलू महिलाओं और आम खरीदारों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में सोने का एक अलग ही धार्मिक और सामाजिक महत्व है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गौरी दिनेश शर्मा (गृहणी) – “शादी-ब्याह हो या कोई भी शुभ प्रसंग, वह सोने के बिना अधूरा माना जाता है। सोना आज के समय में बहुत महंगा जरूर है, लेकिन परंपराओं को निभाने के लिए लोग कम मात्रा में ही सही, सोना जरूर खरीदेंगे। व्यावहारिक तौर पर देखा जाए तो पूरी तरह सोना न खरीदने की इस अपील का शादियों वाले परिवारों पर ज्यादा असर नहीं होगा, क्योंकि शगुन के लिए नया सोना लेना ही पड़ता है।”

कुल मिलाकर, बुरहानपुर का सराफा बाजार इस समय राष्ट्रहित की अपील और पारिवारिक अनिवार्यताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसके चलते ‘गोल्ड रीमेकिंग’ का यह नया फॉर्मूला सुपरहिट साबित हो रहा है।

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