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Burhanpur Latest News : बुरहानपुर कोर्ट का पत्नी के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला, पति को 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता और 32 माह का बकाया देने का आदेश

Burhanpur Latest Newsबुरहानपुर ; बुरहानपुर जिले के नेपानगर में अलग रह रही पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए बुरहानपुर जिला कोर्ट के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने पति को हर महीने 8 हजार रूपए गुजारा भत्ता और पिछले 32 महीने का बकाया 2 लाख 56 हजार रूपए बकाया राशी देने का आदेश दिया है यह आदेश प्रथम अपर सत्र न्यायालय के न्यायधीश सूर्यप्रकाश शर्मा ने दिया जिन्होने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए इस खास फैसले को सुनाया है
क्या है मामला
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल ने बताया पीडिता पत्नी जो बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रहती है ने अपने पति के खिलाफ इंसाफ की मांग की थी जिनका पति महाराष्ट्र के पूना में निवास करता है लंबे वक्त से पत्नी को गुजारा भत्ता की राशी देने से इंकार कर रहा था जिससे पीडिता पत्नी को किसी भी तरह की गुजारा भत्ता के रूप में आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति काफी खराब हो रही थी
पीडिता पत्नी के पक्ष में पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल और अजहर हुसैन ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया पीडिता पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है उन्होने कोर्ट को यह बताने में सफलता पाई कि पति का बर्ताव न सिर्फ अमानवीय था बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन था
कोर्ट ने तमाम तर्कों की सुनवाई करते हुए पीडिता पत्नी के पति को आदेश दिया कि 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे इसके अलावा पिछले 32 महीने का से बाकी 2 लाख 56 हजार की राशी का भुगतान करने का आदेश दिया इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया पति पत्नी का संबंध केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा की गारंटी भी देता है यह फैसला अन्य पतियो से अलग रह रही पीडित पत्नियों के लिए एक नजीर साबित होगा

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क्या है मामला
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल ने बताया पीडिता पत्नी जो बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रहती है ने अपने पति के खिलाफ इंसाफ की मांग की थी जिनका पति महाराष्ट्र के पूना में निवास करता है लंबे वक्त से पत्नी को गुजारा भत्ता की राशी देने से इंकार कर रहा था जिससे पीडिता पत्नी को किसी भी तरह की गुजारा भत्ता के रूप में आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति काफी खराब हो रही थी
पीडिता पत्नी के पक्ष में पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल और अजहर हुसैन ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया पीडिता पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है उन्होने कोर्ट को यह बताने में सफलता पाई कि पति का बर्ताव न सिर्फ अमानवीय था बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन था
कोर्ट ने तमाम तर्कों की सुनवाई करते हुए पीडिता पत्नी के पति को आदेश दिया कि 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे इसके अलावा पिछले 32 महीने का से बाकी 2 लाख 56 हजार की राशी का भुगतान करने का आदेश दिया इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया पति पत्नी का संबंध केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा की गारंटी भी देता है यह फैसला अन्य पतियो से अलग रह रही पीडित पत्नियों के लिए एक नजीर साबित होगा

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क्या है मामला
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल ने बताया पीडिता पत्नी जो बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रहती है ने अपने पति के खिलाफ इंसाफ की मांग की थी जिनका पति महाराष्ट्र के पूना में निवास करता है लंबे वक्त से पत्नी को गुजारा भत्ता की राशी देने से इंकार कर रहा था जिससे पीडिता पत्नी को किसी भी तरह की गुजारा भत्ता के रूप में आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति काफी खराब हो रही थी
पीडिता पत्नी के पक्ष में पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल और अजहर हुसैन ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया पीडिता पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है उन्होने कोर्ट को यह बताने में सफलता पाई कि पति का बर्ताव न सिर्फ अमानवीय था बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन था
कोर्ट ने तमाम तर्कों की सुनवाई करते हुए पीडिता पत्नी के पति को आदेश दिया कि 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे इसके अलावा पिछले 32 महीने का से बाकी 2 लाख 56 हजार की राशी का भुगतान करने का आदेश दिया इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया पति पत्नी का संबंध केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा की गारंटी भी देता है यह फैसला अन्य पतियो से अलग रह रही पीडित पत्नियों के लिए एक नजीर साबित होगा

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क्या है मामला
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल ने बताया पीडिता पत्नी जो बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रहती है ने अपने पति के खिलाफ इंसाफ की मांग की थी जिनका पति महाराष्ट्र के पूना में निवास करता है लंबे वक्त से पत्नी को गुजारा भत्ता की राशी देने से इंकार कर रहा था जिससे पीडिता पत्नी को किसी भी तरह की गुजारा भत्ता के रूप में आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति काफी खराब हो रही थी
पीडिता पत्नी के पक्ष में पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल और अजहर हुसैन ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया पीडिता पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है उन्होने कोर्ट को यह बताने में सफलता पाई कि पति का बर्ताव न सिर्फ अमानवीय था बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन था
कोर्ट ने तमाम तर्कों की सुनवाई करते हुए पीडिता पत्नी के पति को आदेश दिया कि 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे इसके अलावा पिछले 32 महीने का से बाकी 2 लाख 56 हजार की राशी का भुगतान करने का आदेश दिया इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया पति पत्नी का संबंध केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा की गारंटी भी देता है यह फैसला अन्य पतियो से अलग रह रही पीडित पत्नियों के लिए एक नजीर साबित होगा

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क्या है मामला
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल ने बताया पीडिता पत्नी जो बुरहानपुर जिले के नेपानगर में रहती है ने अपने पति के खिलाफ इंसाफ की मांग की थी जिनका पति महाराष्ट्र के पूना में निवास करता है लंबे वक्त से पत्नी को गुजारा भत्ता की राशी देने से इंकार कर रहा था जिससे पीडिता पत्नी को किसी भी तरह की गुजारा भत्ता के रूप में आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति काफी खराब हो रही थी
पीडिता पत्नी के पक्ष में पैरवी कर रहे वकील मनोज अग्रवाल और अजहर हुसैन ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया पीडिता पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है उन्होने कोर्ट को यह बताने में सफलता पाई कि पति का बर्ताव न सिर्फ अमानवीय था बल्कि कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन था
कोर्ट ने तमाम तर्कों की सुनवाई करते हुए पीडिता पत्नी के पति को आदेश दिया कि 8 हजार रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे इसके अलावा पिछले 32 महीने का से बाकी 2 लाख 56 हजार की राशी का भुगतान करने का आदेश दिया इस फैसले में कोर्ट ने साफ किया पति पत्नी का संबंध केवल सामाजिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा की गारंटी भी देता है यह फैसला अन्य पतियो से अलग रह रही पीडित पत्नियों के लिए एक नजीर साबित होगा

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