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burhanpur ka dibbewala:टाईम मैनेजमेंट और काम के प्रति समर्पण की मिसाल है बुरहानपुर का रामकुमार डिब्बेवाला….

शारिक अख्तर 9425343463
burhanpur ka dibbewala:बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के रामकुमार नामक युवा रोजाना व्यापारियों के घर से लंच lunch box के डिब्बे लेकर समय पर उनकी दुकानों पर पहुंचाकर मुंबई के डिब्बेवालों mumbai ke dibbewale की तरह सभी को हैरानी में डाल दिया है, रामकुमार की इस सेवा से संतुष्ट व्यापारी इसे गॉड गिफ्ट मानते है जबकि मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के इस मैनेजमेंट को असाधारण मानते हुए इसे मैनेजमेंट दिल से का नाम दे रहे है।

 

 

माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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burhanpur ka dibbewala:बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के रामकुमार नामक युवा रोजाना व्यापारियों के घर से लंच lunch box के डिब्बे लेकर समय पर उनकी दुकानों पर पहुंचाकर मुंबई के डिब्बेवालों mumbai ke dibbewale की तरह सभी को हैरानी में डाल दिया है, रामकुमार की इस सेवा से संतुष्ट व्यापारी इसे गॉड गिफ्ट मानते है जबकि मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के इस मैनेजमेंट को असाधारण मानते हुए इसे मैनेजमेंट दिल से का नाम दे रहे है।

 

 

माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


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शारिक अख्तर 9425343463
burhanpur ka dibbewala:बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के रामकुमार नामक युवा रोजाना व्यापारियों के घर से लंच lunch box के डिब्बे लेकर समय पर उनकी दुकानों पर पहुंचाकर मुंबई के डिब्बेवालों mumbai ke dibbewale की तरह सभी को हैरानी में डाल दिया है, रामकुमार की इस सेवा से संतुष्ट व्यापारी इसे गॉड गिफ्ट मानते है जबकि मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के इस मैनेजमेंट को असाधारण मानते हुए इसे मैनेजमेंट दिल से का नाम दे रहे है।

 

 

माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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burhanpur ka dibbewala:टाईम मैनेजमेंट और काम के प्रति समर्पण की मिसाल है बुरहानपुर का रामकुमार डिब्बेवाला….

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burhanpur ka dibbewala:बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के रामकुमार नामक युवा रोजाना व्यापारियों के घर से लंच lunch box के डिब्बे लेकर समय पर उनकी दुकानों पर पहुंचाकर मुंबई के डिब्बेवालों mumbai ke dibbewale की तरह सभी को हैरानी में डाल दिया है, रामकुमार की इस सेवा से संतुष्ट व्यापारी इसे गॉड गिफ्ट मानते है जबकि मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के इस मैनेजमेंट को असाधारण मानते हुए इसे मैनेजमेंट दिल से का नाम दे रहे है।

 

 

माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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burhanpur ka dibbewala:बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के रामकुमार नामक युवा रोजाना व्यापारियों के घर से लंच lunch box के डिब्बे लेकर समय पर उनकी दुकानों पर पहुंचाकर मुंबई के डिब्बेवालों mumbai ke dibbewale की तरह सभी को हैरानी में डाल दिया है, रामकुमार की इस सेवा से संतुष्ट व्यापारी इसे गॉड गिफ्ट मानते है जबकि मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के इस मैनेजमेंट को असाधारण मानते हुए इसे मैनेजमेंट दिल से का नाम दे रहे है।

 

 

माया नगरी मुंबई mumbai के डिब्बेवालों का डिब्बों की सही समय पर डिलेवरी के प्रबंधन का लोहा देश से लेकर विदेशियों ने माना है, लेकिन बुरहानपुर के सिंधीबस्ती के लंच के डिब्बे पहुंचाने वाले रामकुमार का मैनेजमेंट मुंबई के डिब्बेवालों के मैनेजमेंट से कम नहीं है, रामकुमार रोजाना दो शिफ्टों में चार घंटों में 100 से अधिक व्यापारियों के घरों से लंच के डिब्बे लेकर सही समय पर उनकी दुकानों पर पहुचाने का काम एक दशक से कर रहा है हालांकि रामकुमार के मामा लालचंद ने 20 साल तक यह काम करने के बाद अपने स्वास्थ्य के चलते यह काम छोड दिया था और ना ही रामकुमार के मामा ने अपने भांजे को यह काम करने के लिए प्रेरीत किया, दरअसल रामकुमार एक व्यापारी के यहां नौकरी करते थे, छोटे से विवाद के बाद रामकुमार ने नौकरी छोड दी और डिब्बे बांटने के काम को एक बडी चुनौती के रूप में लिया और सफल हुए, आत्मविश्वास से लबरेज रामकुमार का कहना है उन्होंने मुंबई के डिब्बेवालों के बारे में सुना है लेकिन उनके डिब्बों पर नाम और नंबर होते है जबकि उनके द्वारा बांटे गए डिब्बे कपडों की थैली में होते है थैलियां भी व्यापारियों की पत्नियां बदल बदल कर देती है लेकिन रामकुमार जिसका डिब्बा है उसी की दुकान पर पहुंचाते है रामकुमार नई पीढी खासकर मैनेजमेंट की शिक्षा लेने वाले छात्रों को सफलता पाने के लिए समय की पाबंदी और विवेक से लिए गए निर्णय लेने की सलाह देते है

 

महिलाएं भी रामकुमार के समय के पाबंदी की कायल है, महिलाओं का कहना है रामकुमार समय पर लंच का डिब्बा लेने आता है और समय पर दुकानों पर पहुंचा देता है कोई भी मौसम हो रामकुमार से महिलाओं को कोई शिकायत नहीं है बल्कि महिलाएं भी रामकुमार के काम के तरीके से हैरान है

 

रोजाना समय पर लंच का डिब्बा पाने वाले व्यापारियों का कहना है रामकुमार खूद भूखा रहकर समय पर खाना पहुंचाने का कार्य करता है व्यापारी इसे रामकुमार को कुदरत की देन मानते है मुंबई के डिब्बेवालों से व्यापारी रामकुमार की तुलना करते हुए कहते है रामकुमार का काम मुंबई के डिब्बेवालों से भी बेहतर है उन्होंने रामकुमार के बेहतर समय प्रबंधन और डिब्बे देने के प्रबंधन को निराला प्रबंधन बताया

रामकुमार ने कुछ खास शिक्षा हासिल नहीं की, बावजूद इसके एक दशक से भी अधिक समय से निरंतर बिना गलती किए रोजाना सैंकडों डिब्बे बांटने की विधा से चिकित्सक भी हैरान है और रामकुमार के इस प्रबंधन को शोध करने की वकालत कर रहे है

मैनेजमेंट एक्सपर्ट रामकुमार के रोजाना चार घंटों में बिना किसी गलती के सौ से अधिक डिब्बे बांटने के प्रबंधन को प्रबंधन दिल से की संज्ञा दे रहे है उनका मानना है रामकुमार का डिब्बे बांटने का काम एक जुनून का नतीजा है मैनेजमेंट की शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों द्वारा रामकुमार के इस कार्य पर शोध कर इसकी मैनेजमेंट केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है रामकुमार के इस बेहतर प्रबंधन से समय का प्रबंधन कमेटमेंट को पूरा करने जैसी विशेषताएं सीखी जा सकती है


प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा – एचओडी सेवा सदन प्रबंधन महाविद्यालय

सेवा सदन कॉलेज के बीबीए संकाय की संकाय प्रमुख HOD प्रोफेसर शिवानी सुबोध मेहरा का कहना है मुंबई के डिब्बेवालों को 6 सिग्मा सर्टिफिकेशन मिला है यानी 1 लाख प्रॉडक्ट बेचने पर केवल 4 शिकायत स्वीकार्य योग्य होती है लेकिन बुरहानपुर के रामकुमार डिब्बेवाला बिना किसी एज्युकेशन, बिना किसी चैनल, बिना किसी सर्टिफिकेशन के बिना किसी अनुभव के अपने काम को क्रियान्वित कर रहे है तो उनके पास एक्सीलेंट टाईम मैनेजमेंट है उनकी ऑब्जर्वेशन स्कील काफी हायर है यानी किसी व्यापारी की महिला ने टिफिन देते समय थैली का रंग या टिफन बदल दिया तो वह तुरंत उसको ऑब्जर्व कर लिया और सही व्यक्ति तक टिफन पहुंचाते है उनकी महिलाओं से वार्तालाप यानी कम्युनिकेशन स्कील भी बेहतर होगी सबसे बडी बात राम कुमार का अपने काम के प्रति समर्पण है बहुत अधिक राशी में वह अपना यह काम नहीं करते इससे साफ जाहिर होता है यह उनका अपने काम के प्रति समर्पण है वर्तमान के प्रबंधन के छात्रों को राम कुमार डिब्बेवाला से सीख लेना चाहिए –

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