Burhanpur Politicsबुरहानपुर: मध्य प्रदेश के राजनीतिक पटल पर सुगबुगाहट तेज हो गई है, और आगामी बुरहानपुर नगर निगम चुनाव को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। इस बार का निकाय चुनाव बेहद रोमांचक होने के आसार हैं, क्योंकि मैदान में मुख्य मुकाबला अब कांग्रेस और बीजेपी तक सीमित न रहकर त्रिकोणीय बनता नजर आ रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे पारंपरिक दलों की नींद उड़ गई है।
संगठन का विस्तार और जन समस्या शिविर
चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए AIMIM ने अपनी एक नई टीम का ऐलान किया है, जो जमीनी स्तर पर तेजी से संगठन का विस्तार कर रही है। आम जनता से सीधा कनेक्ट स्थापित करने के लिए पार्टी द्वारा जगह-जगह जन समस्या शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी की मुख्य नजर बुरहानपुर के अल्पसंख्यक बहुल और अनुसूचित जाति (SC) बहुल वार्डों पर टिकी हुई है, जहां वे मजबूत सेंध लगाने की फिराक में हैं।कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए बड़ी चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही कांग्रेस पार्टी शुरू में AIMIM को हल्के में ले रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि AIMIM कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। पिछले चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस तरह के दलों की मौजूदगी ने कांग्रेस के वोट बैंक को खासा नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, सत्ताधारी दल बीजेपी की भी परेशानियां कम नहीं हुई हैं। त्रिकोणीय मुकाबले के समीकरण दोनों ही प्रमुख दलों के गणित को बिगाड़ सकते हैं।भीतरखाने अंतर्विरोध और असंतोष की चुनौती
एक तरफ जहां पार्टी का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ AIMIM के भीतर कुछ असंतुष्ट नेता फिलहाल पार्टी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान का लगातार विरोध कर रहे हैं। विरोधस्वरूप पुतला दहन और इस्तीफे की पेशकश जैसे आंदोलनों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं। हालांकि, पार्टी आलाकमान ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
कांग्रेस की गुटबाजी का मिलेगा फायदा
कांग्रेस पार्टी के भीतर कमजोर संगठन और गुटबाजी का सीधा लाभ AIMIM को नगर निगम चुनाव में मिल सकता है। चर्चा यह भी है कि कांग्रेस में टिकट कटने से नाराज और बागी तेवर अपनाने वाले कई जिताऊ उम्मीदवार ऐन वक्त पर AIMIM का रुख कर सकते हैं, जिससे स्थानीय राजनीतिक समीकरण किसी भी करवट बैठ सकते हैं।
कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा और एमपीसीसी का पलटवार
कांग्रेस पार्टी में चल रही गुटबाजी और कमजोर संगठन का लाभ AIMIM को मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही थी। माना जा रहा था कि टिकट कटने से नाराज जिताऊ प्रत्याशी AIMIM का रुख कर सकते हैं। लेकिन AIMIM के इस प्रभाव को शुरुआती चरण में ही नाकाम करने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने पहला बड़ा दांव खेल दिया है।कांग्रेस ने नगर निगम में डिप्टी स्पीकर और सक्रिय पार्षद फहीम हाशमी को जिला कांग्रेस कमेटी शहर का जिला संगठन मंत्री (महासचिव) जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी को उम्मीद है कि फहीम हाशमी बुरहानपुर में कांग्रेस के जनाधार को मजबूती देंगे और ऐसी रणनीतिक घेराबंदी करेंगे जिससे AIMIM के प्रभाव को रोका जा सके। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या फहीम हाशमी पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरकर कांग्रेस के किले को बचा पाते हैं या नहीं।




