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burhanpurnews,अवैध कब्जे से किसानों को मिली राहत: बुरहानपुर के लोनी गांव में दो किलोमीटर रास्ता होगाअतिक्रमण मुक्त

 

burhanpurnews,बुरहानपुर।(एग्रीकल्चर रिपोर्टर)मप्र और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बुरहानपुर जिले के लोनी गांव के किसानों को वर्षों पुरानी एक बड़ी समस्या से आखिरकार राहत मिल गई है। खेतों तक जाने वाले करीब दो किलोमीटर लंबे रास्ते पर कुछ खेत मालिकों ने अतिक्रमण कर खेती शुरू कर दी थी। इससे किसानों को अपनी फसल, खासकर केले की ढुलाई में भारी परेशानी हो रही थी।

रावेर महाराष्ट्र तहसीलदार बंदू कापसे व बुरहानपुर तहसीलदार प्रवीण ओहरी चर्चा करते हुए

अतिक्रमण के कारण ट्रक, ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे बड़े वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। मजबूरी में किसानों को केले की फसल मजदूरों के माध्यम से बाहर निकालनी पड़ रही थी, जिससे उन्हें चार गुना अधिक मजदूरी चुकानी पड़ रही थी।

इस समस्या से परेशान किसानों ने बुरहानपुर कलेक्टर और महाराष्ट्र के जलगांव जिले के कलेक्टर से शिकायत की। साथ ही उन्होंने रावेर सांसद और केंद्रीय मंत्री रक्षा ताई खडसे से भी मदद की गुहार लगाई।
रावेर तहसीलदार व बुरहानपुर तहसीलदार के नेतृत्व में हुई कार्यवाही
किसानों के व्दारा जलगांव कलेक्टर और बुरहानपुर कलेक्टर को लगातार इस समस्या से अवगत कराया जा रहा था जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है जलगांव कलेक्टर और बुरहानपुर कलेक्टर ने किसानों की इस समस्या के समाधान के लिए रावेर महाराष्ट्र के तहसीलदार बंदू कापसे और बुरहानपुर के तहसीलदार प्रवीण ओहरी के नेतृत्व में राजस्व विभाग के अमले ने नपती की जो अतिक्रमण था उसे जेसीबी की मदद से हटाया और खेत मालिकों के लिए इतना रास्ता रिक्त कराया जिससे किसानों के खेतों तक ट्रक ट्रेक्टर ट्रॉली वाहन आसानी से पहुंच सकेगे

किसानों की इस गंभीर समस्या को दोनों जिलों के कलेक्टरों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने-अपने तहसीलदारों और राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर समाधान के निर्देश दिए। राजस्व विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पूरी नपती की और दो किलोमीटर लंबे रास्ते से अतिक्रमण हटाया।

अब इस रास्ते से ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे बड़े वाहन आसानी से खेतों तक पहुंच सकेंगे। किसानों ने बताया कि इससे उन्हें अब अपनी फसल की ढुलाई में सुविधा मिलेगी और अतिरिक्त मजदूरी का बोझ भी खत्म हो गया है।

किसानों ने दोनों राज्यों के प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस सकारात्मक पहल से उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है।

यह कार्रवाई मप्र और महाराष्ट्र के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बनी है, जिससे सीमावर्ती गांवों के किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

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