Tuesday, January 27, 2026
Burhānpur
scattered clouds
22.3 ° C
22.3 °
22.3 °
45 %
2kmh
40 %
Tue
32 °
Wed
29 °
Thu
29 °
Fri
33 °
Sat
27 °

Rajasthan festival: राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में तीन दशक से व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया कादरिया स्कूल रोड स्थित माहेश्वरी समाज के बजरंग तापडिया के निवास पर समाज की महिलाए सातुडी तीज पर्व मनाने के लिए एकत्र हुई ।

माहेश्वरी समाज की वरिष्ठ सदस्य रूकमणि बजाज ने बताया भारतीय संस्कृति के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी


माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है
निकिता बजाज के विवाह के पश्चात यह पहली तीज थी उन्होने इस तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

समाज की यह महिलाए हुई

  •  

शनिवार को बुरहानपुर में आयोजित सातुडी तीज पर्व पर रूकमणि बजाज, राधिका तापडिया, निकिता बजाज, गायत्री बजाज, सुमित्रा तापडिया, लक्ष्मी तापडिया, सरिता तापडिया, सोनम तापडिया, अभिलाषा राठी, आदि महिलाए शामिल हुई

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles

Rajasthan festival: राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में तीन दशक से व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया कादरिया स्कूल रोड स्थित माहेश्वरी समाज के बजरंग तापडिया के निवास पर समाज की महिलाए सातुडी तीज पर्व मनाने के लिए एकत्र हुई ।

माहेश्वरी समाज की वरिष्ठ सदस्य रूकमणि बजाज ने बताया भारतीय संस्कृति के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी


माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है
निकिता बजाज के विवाह के पश्चात यह पहली तीज थी उन्होने इस तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

समाज की यह महिलाए हुई

  •  

शनिवार को बुरहानपुर में आयोजित सातुडी तीज पर्व पर रूकमणि बजाज, राधिका तापडिया, निकिता बजाज, गायत्री बजाज, सुमित्रा तापडिया, लक्ष्मी तापडिया, सरिता तापडिया, सोनम तापडिया, अभिलाषा राठी, आदि महिलाए शामिल हुई

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

Latest Articles

Rajasthan festival: राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में तीन दशक से व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया कादरिया स्कूल रोड स्थित माहेश्वरी समाज के बजरंग तापडिया के निवास पर समाज की महिलाए सातुडी तीज पर्व मनाने के लिए एकत्र हुई ।

माहेश्वरी समाज की वरिष्ठ सदस्य रूकमणि बजाज ने बताया भारतीय संस्कृति के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी


माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है
निकिता बजाज के विवाह के पश्चात यह पहली तीज थी उन्होने इस तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

समाज की यह महिलाए हुई

  •  

शनिवार को बुरहानपुर में आयोजित सातुडी तीज पर्व पर रूकमणि बजाज, राधिका तापडिया, निकिता बजाज, गायत्री बजाज, सुमित्रा तापडिया, लक्ष्मी तापडिया, सरिता तापडिया, सोनम तापडिया, अभिलाषा राठी, आदि महिलाए शामिल हुई

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles

Rajasthan festival: राजस्थानी माहेश्वरी समाज की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाया कजली सातुडी तीज का उत्सव

Rajasthan festivalबुरहानपुर । बुरहानपुर में तीन दशक से व्यापार व्यवसाय करने के लिए राजस्थान से आए माहेश्वरी समाज व्दारा हर साल की तरह इस साल भी राजस्थान के प्रमुख पर्व सातुडी तीज परंपरागत रूप से मनाया गया कादरिया स्कूल रोड स्थित माहेश्वरी समाज के बजरंग तापडिया के निवास पर समाज की महिलाए सातुडी तीज पर्व मनाने के लिए एकत्र हुई ।

माहेश्वरी समाज की वरिष्ठ सदस्य रूकमणि बजाज ने बताया भारतीय संस्कृति के अनेक पर्व व त्यौहार हमारी संस्कृति प्रदर्शित करती है यह व्रत और उपवास पति व परिवार की मंगल कामना वाले तो होते ही है साथ ही इस अवसर पर तैयार होने वाले पकवान राजस्थान की पाक कला की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करने वाले रहते है ऐसा ही एक पर्व प्रत्येक वर्ष भाद्रपक्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया को सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है है जिसे सातुडी तीज के रूप में मनाया जाता है जिसे सातुडी तीज भी कहा जाता है यह उत्सव क्षेत्र के माहेश्वरी की महिलाओ और राजस्थान की निवासी सभी महिलाओं व्दारा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख शांति की कामना के लिए मनाया जाता है इसके तहत परिवार की महिलाए पूरा दिन निर्जल रहकर उपवास करती है व रात्री के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर सत्तु का भोग लगाकर प्रसार रूप में सत्तु ग्रहण करती है

पंद्रह दिन पूर्व शुरू हो जाती ह तैयारी


माहेश्वरी समाज की सुमित्रादेवी बजरंग तापडिया ने बताया समाज के सबसे बडे त्यौहार सातुडी तीज की तैयारिया हर घर में पंद्रह दिन पहले शुरू हो जाती है व घी चीनी मिलाकर पिंडे बनाए जाते है तीन अनाज के बनने वाले पिंडे स्वाद की विविधता को बताता है तीज के दिन महिलाए पूरे दिन उपवास रखती है संघ्या के समय सामूहिक रूप से पारंपरिक वस्त्र पहनकर नीमडी पूजन किया जाता है रात में चांद देखने के बाद सामूहिक पूजन करने के बाद सत्तु को पासा जाता है व फलाहर के साथ प्रसाद रूप में सत्तु ग्रहण किया जाता है इस मिठाई की यह विशेषता होती है कि बिना कैमिकल के होने के चलते लंबे समय तक मिठाई रखी जा सकती है
निकिता बजाज के विवाह के पश्चात यह पहली तीज थी उन्होने इस तीज में उपवास रखा पारंपरिक वस्त्र और आभुषण पहनकर पूजा अर्चना की उन्होने बताया इस तीज में होने वाली पूजा व उपवास से पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है साथ ही परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है
सातुडी तीज में शामिल राधिका तापडिया ने बताया राजस्थान की वर्षो पूरानी यह परंपरा है इस में कुंवारी लडकिया उपवास पूजन कर अच्छे वर और घर परिवार मिलने की कामना करती है जो पूरी होती है वहीं शादी शुदा महिलाए पति की लंबी उम्र और घर परिवार में सुख शांति व खुशहाली की कामना करती है

समाज की यह महिलाए हुई

  •  

शनिवार को बुरहानपुर में आयोजित सातुडी तीज पर्व पर रूकमणि बजाज, राधिका तापडिया, निकिता बजाज, गायत्री बजाज, सुमित्रा तापडिया, लक्ष्मी तापडिया, सरिता तापडिया, सोनम तापडिया, अभिलाषा राठी, आदि महिलाए शामिल हुई

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles