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Maa Tujeh Salam:फुटपाथ पर चप्पल सिलने का काम करने वाली रेखा परदेशी का अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना

Maa Tujeh Salam:मां के जज्बे को सलाम
Maa Tujeh Salam:बुरहानपुर।Burhanpur  उपनगर लालबाग में जिले की पहली महिला Rekha Pardeshi रेखा परदेशी है जो 5 साल से Foot Path फुटपाथ पर बैठकर Shoes Repairing चप्पल जुते सिलने का काम करके अपना और अपने परिवार का जीवन यापन कर रही है रेखा अपनी बेटी नेहा को Doctor डॉक्टर बनाना चाहती है अपनी बेटी के लिए रेखा परदेशी खूब मेहनत करती है हालांकि रेखा परदेशी खुद तो पढाई नहीं कर पाई लेकिन अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का उसका सपना है अपने इस सपने को पूरा करने के लिए यह मां फुटपाथ पर बैठकर लोगो की चप्पल जुते रिपेयर करने का काम करती है

राजनीति से जुडे यह खबर जरूर पढे

जिले के उपनगर लालबाग निवासी रेखा परदेसी का तलाक होने के बाद वह अपने पिता के यहां रहने आ गई रेखा ने अपने पिता से जुते चप्पल सिलने का काम सीखा उसके बाद पांच साल से Burhanpur Railway Station  रेलवे स्टेशन के पास लोगो के चप्पल जुते सिलने का काम करके अपना जीवन यापन करती है रेखा परदेशी का सपना है अपनी Daughter बेटी को डॉक्टर बनाने का फिलहाल रेखा परदेशी की बेटी नेहा कक्षा 11वीं Bio Science बायो सांइस में पढाई कर रही है बेटी का कहना है मां का सपना उसे डॉक्टर बनाने का है इस लिए उसने 11वीं में बायो साइंस सब्जेक्ट लिया है वह भी अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए दिल लगाकर पढाई करती है
ऐसा नहीं है कि रेखा परदेशी ने यह काम सीख कर किसी को नहीं सिखाया बल्कि रेखा ने अबतक 20 से अधिक महिलाओं को चप्पल जुते सिलने का काम सिखाकर उन्हें भी रोजगार हासिल करना बताया है
रेखा परदेशी का कहना है वह फुटपाथ पर बैठकर चप्पल जुते सिलने का काम करती है उसकी जिला प्रशासन से मांग है कि उन्हें गुमटी आवंटित की जाए अगर उन्हें गुमटी मिल जाती है तो उसका रोजगार बढ जाएगा जिससे उसे अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने में आसानी होगी

पढिए कहां डॉक्टरों ने उडते हवाई जहाज में बचाई बच्चे की जान

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Maa Tujeh Salam:बुरहानपुर।Burhanpur  उपनगर लालबाग में जिले की पहली महिला Rekha Pardeshi रेखा परदेशी है जो 5 साल से Foot Path फुटपाथ पर बैठकर Shoes Repairing चप्पल जुते सिलने का काम करके अपना और अपने परिवार का जीवन यापन कर रही है रेखा अपनी बेटी नेहा को Doctor डॉक्टर बनाना चाहती है अपनी बेटी के लिए रेखा परदेशी खूब मेहनत करती है हालांकि रेखा परदेशी खुद तो पढाई नहीं कर पाई लेकिन अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का उसका सपना है अपने इस सपने को पूरा करने के लिए यह मां फुटपाथ पर बैठकर लोगो की चप्पल जुते रिपेयर करने का काम करती है

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जिले के उपनगर लालबाग निवासी रेखा परदेसी का तलाक होने के बाद वह अपने पिता के यहां रहने आ गई रेखा ने अपने पिता से जुते चप्पल सिलने का काम सीखा उसके बाद पांच साल से Burhanpur Railway Station  रेलवे स्टेशन के पास लोगो के चप्पल जुते सिलने का काम करके अपना जीवन यापन करती है रेखा परदेशी का सपना है अपनी Daughter बेटी को डॉक्टर बनाने का फिलहाल रेखा परदेशी की बेटी नेहा कक्षा 11वीं Bio Science बायो सांइस में पढाई कर रही है बेटी का कहना है मां का सपना उसे डॉक्टर बनाने का है इस लिए उसने 11वीं में बायो साइंस सब्जेक्ट लिया है वह भी अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए दिल लगाकर पढाई करती है
ऐसा नहीं है कि रेखा परदेशी ने यह काम सीख कर किसी को नहीं सिखाया बल्कि रेखा ने अबतक 20 से अधिक महिलाओं को चप्पल जुते सिलने का काम सिखाकर उन्हें भी रोजगार हासिल करना बताया है
रेखा परदेशी का कहना है वह फुटपाथ पर बैठकर चप्पल जुते सिलने का काम करती है उसकी जिला प्रशासन से मांग है कि उन्हें गुमटी आवंटित की जाए अगर उन्हें गुमटी मिल जाती है तो उसका रोजगार बढ जाएगा जिससे उसे अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने में आसानी होगी

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ऐसा नहीं है कि रेखा परदेशी ने यह काम सीख कर किसी को नहीं सिखाया बल्कि रेखा ने अबतक 20 से अधिक महिलाओं को चप्पल जुते सिलने का काम सिखाकर उन्हें भी रोजगार हासिल करना बताया है
रेखा परदेशी का कहना है वह फुटपाथ पर बैठकर चप्पल जुते सिलने का काम करती है उसकी जिला प्रशासन से मांग है कि उन्हें गुमटी आवंटित की जाए अगर उन्हें गुमटी मिल जाती है तो उसका रोजगार बढ जाएगा जिससे उसे अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने में आसानी होगी

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ऐसा नहीं है कि रेखा परदेशी ने यह काम सीख कर किसी को नहीं सिखाया बल्कि रेखा ने अबतक 20 से अधिक महिलाओं को चप्पल जुते सिलने का काम सिखाकर उन्हें भी रोजगार हासिल करना बताया है
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